22-08-2024 प्रथमाचार्य शान्तिसागरजी आचार्य पदारोहण शताब्दी महोत्सव वर्ष 2024 भाग -16
0:00
बुझ्छा
बुझ्छा
0:05
हुआ मुनि धर्म दीपको
हुआ मुनि धर्म दीपको
0:10
सैयम घृत से
सैयम घृत से
0:13
जला दिया उपसर गोमे संघर शोमे समता धरत पगोर किया
जला दिया उपसर गोमे संघर शोमे समता धरत पगोर किया
0:26
ऐसे अनुपम उपकारों
ऐसे अनुपम उपकारों
0:30
से रुनी हो गई
से रुनी हो गई
0:33
सभीष्रमन शांति सागराचार्य देवको मेरा बारं बारनमन
सभीष्रमन शांति सागराचार्य देवको मेरा बारं बारनमन
0:45
मेरा बारं बारनमन
मेरा बारं बारनमन
1:14
पूज्य
पूज्य
1:20
आचारिय श्री वर्धमान सागर्जी मुनी महराज की, पूज्य निर्यापक्ष्रमन मुनी वर्शरी धर्म सागर्जी मुनी महराज की, अहिंसा पर्मो धर्म की.
आचारिय श्री वर्धमान सागर्जी मुनी महराज की, पूज्य निर्यापक्ष्रमन मुनी वर्शरी धर्म सागर्जी मुनी महराज की, अहिंसा पर्मो धर्म की.
1:41
जीवन एक प्रवाह की तरह है,
जीवन एक प्रवाह की तरह है,
1:45
जिस प्रकार गतिमान नदी, निरंतर साध्य की ओर, लक्ष की ओर बढ़ती जाती हैं, वैसे ही साधक, अपने धेय की ओर, अपने लक्ष की ओर, निरंतर अपनी जीवन यात्रा को बढ़ाती है
जिस प्रकार गतिमान नदी, निरंतर साध्य की ओर, लक्ष की ओर बढ़ती जाती हैं, वैसे ही साधक, अपने धेय की ओर, अपने लक्ष की ओर, निरंतर अपनी जीवन यात्रा को बढ़ाती है
1:58
ऐसे ही महान मुक्तिपत के पथिक महावीर
ऐसे ही महान मुक्तिपत के पथिक महावीर
2:02
के महामार्ग पर चलने वाले महावरती आचारे भगवान श्री शांती सागर्जी महराज का 1925 का चात्रमास कहां हो रहा था?
के महामार्ग पर चलने वाले महावरती आचारे भगवान श्री शांती सागर्जी महराज का 1925 का चात्रमास कहां हो रहा था?
2:11
धर्मनगरी कुम्भोज में हो रहा था और उस कुम्भोज धर्मनगरी में
धर्मनगरी कुम्भोज में हो रहा था और उस कुम्भोज धर्मनगरी में
2:16
उन्होंने वहां बहुत ही साधगी पूर्ण और अध्यात्मिक उंचायु को छुने वाला एक स्रेश्टतम साधना का मारग अपनाय था और उस चात्रमास के दवरान
उन्होंने वहां बहुत ही साधगी पूर्ण और अध्यात्मिक उंचायु को छुने वाला एक स्रेश्टतम साधना का मारग अपनाय था और उस चात्रमास के दवरान
2:28
पूज्या अचारेदेव कवल चंद्रायन वरत की साधना कर रहे थे कवल से वरत की साधना
पूज्या अचारेदेव कवल चंद्रायन वरत की साधना कर रहे थे कवल से वरत की साधना
2:34
कल आपन इस बात पर चर्चा कर रहे थे थोड़ी सी उस विधी के बारे में
कल आपन इस बात पर चर्चा कर रहे थे थोड़ी सी उस विधी के बारे में
2:40
परफेक्ट लिस ध्यान में नहीं आ पाया था तो कवल चंद्रायन वरत की विधी भी बहुत कठिन होती है
परफेक्ट लिस ध्यान में नहीं आ पाया था तो कवल चंद्रायन वरत की विधी भी बहुत कठिन होती है
2:47
हर महिने में शुकल पक्षा और कृष्ण पक्षा पक्षा अर्थाक पंदरा दिन
हर महिने में शुकल पक्षा और कृष्ण पक्षा पक्षा अर्थाक पंदरा दिन
2:52
तो कृष्ण पक्षा और शुकल पक्षा से दो-दो 15-15 दिन की टर्म आते है तो उसमें अमावश्या की तिथि में क्या करना होता है
तो कृष्ण पक्षा और शुकल पक्षा से दो-दो 15-15 दिन की टर्म आते है तो उसमें अमावश्या की तिथि में क्या करना होता है
3:04
अमावस के दिन उपवास करना होता है, निर्जला
अमावस के दिन उपवास करना होता है, निर्जला
3:08
उपवास, अनशन, और फिर दूसरे दिन जो प्रतिपदा होती है, उस दिन सिर्फ एक ग्रास अन लेना होता है, कितना?
उपवास, अनशन, और फिर दूसरे दिन जो प्रतिपदा होती है, उस दिन सिर्फ एक ग्रास अन लेना होता है, कितना?
3:18
सामने चपन भोग वेंजन हो, पंच पकवान हो, फिर भी उसमें से एक ही ग्रास अन लेना है कितने?
सामने चपन भोग वेंजन हो, पंच पकवान हो, फिर भी उसमें से एक ही ग्रास अन लेना है कितने?
3:27
पानी आप पेट भर ले सकते हैं, लेकिन अन एक ही ग्रास लेना है
पानी आप पेट भर ले सकते हैं, लेकिन अन एक ही ग्रास लेना है
3:32
उसके दूसरे दिन अर्था द्वितिया को दो
उसके दूसरे दिन अर्था द्वितिया को दो
3:36
ग्रास आहर और यथेच्च जल जितनी आपकी आशक्ता
ग्रास आहर और यथेच्च जल जितनी आपकी आशक्ता
3:39
है उतना जल ले सकते हैं तीसरे दिन तीन ग्रास अन्ण और जितना चाहे उतना जल इस प्रकार एक-एक ग्रास बढ़ाते जाना
है उतना जल ले सकते हैं तीसरे दिन तीन ग्रास अन्ण और जितना चाहे उतना जल इस प्रकार एक-एक ग्रास बढ़ाते जाना
3:50
कहां तक जाना पाउर्णिमा
कहां तक जाना पाउर्णिमा
3:53
तक जाना अर्था आत 15 ग्रास
तक जाना अर्था आत 15 ग्रास
3:56
तक गए कितने 15 ग्रास
तक गए कितने 15 ग्रास
4:00
एक एक ग्रास रोज बढ़ाते होए देखिए बहुत कठिन होता
एक एक ग्रास रोज बढ़ाते होए देखिए बहुत कठिन होता
4:03
है आप लोग भी समझते हैं इस चीज को सामने
है आप लोग भी समझते हैं इस चीज को सामने
4:06
मैंने कल पर सो कहा था उपवास करना आसान होता
मैंने कल पर सो कहा था उपवास करना आसान होता
4:10
है यग कि उपवास के पहले ही
है यग कि उपवास के पहले ही
4:20
भी उसी प्रकार की activity होती है लेकिन अंत्रा है बहुत कठिन होता है
भी उसी प्रकार की activity होती है लेकिन अंत्रा है बहुत कठिन होता है
4:26
क्योंकि वो अचानक और अकल्पित रूप से होता है फिर भी सादक उसके लिए भी तयार रहते हैं और ये कवल चंद्रायन और भी कठिन है पहले दिन तो क्या किया इसमें
क्योंकि वो अचानक और अकल्पित रूप से होता है फिर भी सादक उसके लिए भी तयार रहते हैं और ये कवल चंद्रायन और भी कठिन है पहले दिन तो क्या किया इसमें
4:36
उपवास किया दूसरे दिन एक ही ग्रास
उपवास किया दूसरे दिन एक ही ग्रास
4:40
आप लोग जानते है कि कोई वेक्ती यदि ग्रुहस्त
आप लोग जानते है कि कोई वेक्ती यदि ग्रुहस्त
4:44
है और वह ग्रुहस्त यदि उपवास करता है अर्थात अंशन तप करता है तो वह दूसरे दिन जब भी पारना करता है क्या करता है
है और वह ग्रुहस्त यदि उपवास करता है अर्थात अंशन तप करता है तो वह दूसरे दिन जब भी पारना करता है क्या करता है
4:55
पारना करने के पहले अपने हाथ के बाहियां को पीछे खेंच लेता है
पारना करने के पहले अपने हाथ के बाहियां को पीछे खेंच लेता है
5:00
अर्थात यदि उसको भूग पर नियंतरन प्राप्त नहीं हुआ हो तो वह जल्दी जल्दी में खाने के लिए प्रयास करता है
अर्थात यदि उसको भूग पर नियंतरन प्राप्त नहीं हुआ हो तो वह जल्दी जल्दी में खाने के लिए प्रयास करता है
5:07
अपने ही समडोली नगर में एक सज्जन ने एक बार जब उनको उपवास आदी की साधना पता नहीं थी, उन्होंने स्वयं मुझे बताया.
अपने ही समडोली नगर में एक सज्जन ने एक बार जब उनको उपवास आदी की साधना पता नहीं थी, उन्होंने स्वयं मुझे बताया.
5:16
उपवास क्या होता हैं उनको मालूम नहीं, और यहां पर किनी का चात्रोमास हो रहा था, और उस चात्रोमास में उस व्यक्ति के भी भाव हो हैं कि मुझे उपवास करना है.
उपवास क्या होता हैं उनको मालूम नहीं, और यहां पर किनी का चात्रोमास हो रहा था, और उस चात्रोमास में उस व्यक्ति के भी भाव हो हैं कि मुझे उपवास करना है.
5:26
अब उन्होंने सुभा उन महराज्जी से उपवास का वृत ले लिया लेकिन दिन भर बड़े आकुल वे आकुलता हुई
अब उन्होंने सुभा उन महराज्जी से उपवास का वृत ले लिया लेकिन दिन भर बड़े आकुल वे आकुलता हुई
5:32
कभी उपवास का उनको अभ्यास नहीं था दिन भर छटपटा हट हुई जैसे तैसे दिन बीत गया रात हो गई
कभी उपवास का उनको अभ्यास नहीं था दिन भर छटपटा हट हुई जैसे तैसे दिन बीत गया रात हो गई
5:39
रात में 9, 10, 11 बजे तक जैसे तैसे सम्मल निकाल लिया और 12 बजने के बाद बैट गए भूजन को
रात में 9, 10, 11 बजे तक जैसे तैसे सम्मल निकाल लिया और 12 बजने के बाद बैट गए भूजन को
5:47
क्योंकि उन्होंने क्या माना था 12 के बाद दिन बदलता है अब वो सोचने लगे दिन तो बदल गए चलो मिटर चालो करो अपना
क्योंकि उन्होंने क्या माना था 12 के बाद दिन बदलता है अब वो सोचने लगे दिन तो बदल गए चलो मिटर चालो करो अपना
5:55
देखो कितना कठिन होता है यह विनोध नहीं है अब
देखो कितना कठिन होता है यह विनोध नहीं है अब
5:59
उसमें विनोध हो गया एक अलग बात है लेकिन प्रैक्टिकली
उसमें विनोध हो गया एक अलग बात है लेकिन प्रैक्टिकली
6:02
उन्होंने मुझे स्वेम बताया कुछ साल पहले
उन्होंने मुझे स्वेम बताया कुछ साल पहले
6:05
बताया था तो पहले दिन उपवास
बताया था तो पहले दिन उपवास
6:08
किया दूसरे दिन सिर्फ एक ही ग्रास ग्रहन करना
किया दूसरे दिन सिर्फ एक ही ग्रास ग्रहन करना
6:11
है उपवास के बाद इतना सारा अन्न
है उपवास के बाद इतना सारा अन्न
6:14
वहां दि
वहां दि
6:26
सिर्फ दो ही ग्रास एक ग्रास तो नीचे उतरते उतरते पच गया होगा
सिर्फ दो ही ग्रास एक ग्रास तो नीचे उतरते उतरते पच गया होगा
6:31
दूसरे दिन सिर्फ दो ही ग्रास पानी जितना चाहो लेलो
दूसरे दिन सिर्फ दो ही ग्रास पानी जितना चाहो लेलो
6:35
तीषरी दिन तिन ग्रास ऐसे एक ग्रास बढ़ाते-बढ़ाते पवर्निमा तक जाना है ये कितने ग्रास हो गए फिर
तीषरी दिन तिन ग्रास ऐसे एक ग्रास बढ़ाते-बढ़ाते पवर्निमा तक जाना है ये कितने ग्रास हो गए फिर
6:56
तीन दो एक और फिर एक आमावसे
तीन दो एक और फिर एक आमावसे
6:59
आती है उस दिन और उपवास उस
आती है उस दिन और उपवास उस
7:03
दिन फिर क्या होगे और उपवास करना तब जाकर
दिन फिर क्या होगे और उपवास करना तब जाकर
7:07
के वरत
के वरत
7:08
संपन्न होता
संपन्न होता
7:09
है पुर्षारत
है पुर्षारत
7:22
वाली बात है पिर इस प्रकार उनने कवल चंद्रायन का वरत किया
वाली बात है पिर इस प्रकार उनने कवल चंद्रायन का वरत किया
7:27
उसी दर्मयान रोज के रोज वहां पर
उसी दर्मयान रोज के रोज वहां पर
7:30
मंदिर में सौध्याय और प्रवचन चलता था गणिक्प्पपन
मंदिर में सौध्याय और प्रवचन चलता था गणिक्प्पपन
7:36
सेंपरहे माहें, पाट शाला के संबंद में कुछ विकल्पूंद हुआ था, कुछ विवाद उत्पन हुआ था
सेंपरहे माहें, पाट शाला के संबंद में कुछ विकल्पूंद हुआ था, कुछ विवाद उत्पन हुआ था
7:44
अब वहां के लोगों ने आकर आचारे महराज से निवेदन किया कि गुरुवर यह जो पाठशाला का बखेडा है इसे आप ही सुलजाईए
अब वहां के लोगों ने आकर आचारे महराज से निवेदन किया कि गुरुवर यह जो पाठशाला का बखेडा है इसे आप ही सुलजाईए
7:52
इसके समस्या का समाधन आप ही कीजिए तो
इसके समस्या का समाधन आप ही कीजिए तो
7:56
वहां उस गाव के जो पाटिल थे कुमभोज में भी पाटिल लोग
वहां उस गाव के जो पाटिल थे कुमभोज में भी पाटिल लोग
7:59
है गाव के मुख्या और वो पाटिल
है गाव के मुख्या और वो पाटिल
8:03
जो थे वो स्पष्ट वकता थे पश्ट
जो थे वो स्पष्ट वकता थे पश्ट
8:06
बोलने वाले और कटू भाषी भी थे कटू बोलते
बोलने वाले और कटू भाषी भी थे कटू बोलते
8:09
थे एक दिन उन पाटिल साहब ने बोला कि
थे एक दिन उन पाटिल साहब ने बोला कि
8:13
शास्त्र तो चंद्रसागर ज चंदर्सागर जी महराज बताते हैं।
शास्त्र तो चंद्रसागर ज चंदर्सागर जी महराज बताते हैं।
8:43
प्रभुचन
प्रभुचन
9:05
सुन्दर रूप से वो करेंगे और आचारे प्रशांति सागर जी बैठे ना कुछ आता है ना कुछ बोलते हैं
सुन्दर रूप से वो करेंगे और आचारे प्रशांति सागर जी बैठे ना कुछ आता है ना कुछ बोलते हैं
9:12
ए बात आचारी शांति सागर जी तक पहुंच गई फिर
ए बात आचारी शांति सागर जी तक पहुंच गई फिर
9:16
भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कुछ दिन बाद
भी उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और कुछ दिन बाद
9:19
ए पाठ शालाई की समस्या सुलजाने का प्रसंग
ए पाठ शालाई की समस्या सुलजाने का प्रसंग
9:22
जब आया तब आचारी शांति सागर जी महराज
जब आया तब आचारी शांति सागर जी महराज
9:25
ने वहाँ के समाज के लोगों को कहा कि जाओ और
ने वहाँ के समाज के लोगों को कहा कि जाओ और
9:29
आप
आप
9:41
वह आयेंगे और आपके कुछ कहने पर कुछ आपका अपमान करेंगे तो उचित नहीं होगा
वह आयेंगे और आपके कुछ कहने पर कुछ आपका अपमान करेंगे तो उचित नहीं होगा
9:48
जब चंदर साघर जी ऐसा कह रहे थे तो योगा योग से पाटिल साब मंदिर में प्रवेश कर ही रहे थे
जब चंदर साघर जी ऐसा कह रहे थे तो योगा योग से पाटिल साब मंदिर में प्रवेश कर ही रहे थे
9:55
मंदिर में आ ही रहे थे उसे समय चंदरसागर जी ने शन्तीर सہगर महाराज को कहा चंदरसागर जी को भी पता नговी कि ओँगर हो आये है शन्तीर सागर महाराज को पता नवी कि ओँगर हो आ रहे है
मंदिर में आ ही रहे थे उसे समय चंदरसागर जी ने शन्तीर सہगर महाराज को कहा चंदरसागर जी को भी पता नговी कि ओँगर हो आये है शन्तीर सागर महाराज को पता नवी कि ओँगर हो आ रहे है
10:06
लेकिन उन्हों ने वहाँ खड़े रह करके सुन लेया कि मेरे बारे में चंद्रसागर महराज आचारी शंत्य सागरी को कह रहे है
लेकिन उन्हों ने वहाँ खड़े रह करके सुन लेया कि मेरे बारे में चंद्रसागर महराज आचारी शंत्य सागरी को कह रहे है
10:13
अब शंत्य सागर महराज क्या प्रतिक्रिया देते है एप देखने के लिए वे वही खड़े रहकर के सुनने लगे चंद्रसागरजी ने कहा
अब शंत्य सागर महराज क्या प्रतिक्रिया देते है एप देखने के लिए वे वही खड़े रहकर के सुनने लगे चंद्रसागरजी ने कहा
10:22
कि आचारी स्री वे आएंगे आपको कुछ कटू बोलेंगे अद्वा तद्वा बोलेंगे तो आपका अपमान हो जाएगा और यह उचित नहीं
कि आचारी स्री वे आएंगे आपको कुछ कटू बोलेंगे अद्वा तद्वा बोलेंगे तो आपका अपमान हो जाएगा और यह उचित नहीं
10:30
टब शयन्ति सगर जी महराज केने लगे अयलक जी अपमान की बात वहां आती है जहां मान होता है मान अर्थत अहंकर
टब शयन्ति सगर जी महराज केने लगे अयलक जी अपमान की बात वहां आती है जहां मान होता है मान अर्थत अहंकर
10:40
अपमान की बात वहाँ पर आती है जहां मान अर्थत
अपमान की बात वहाँ पर आती है जहां मान अर्थत
10:43
अहंकर होता है जिसे मान ही नहीं उसे अपमान किस चीज का उनको बुलाओ समाज में सरवत्रा आनंद और समवाद होना चाहिए मुझे इस विवाद को मिटाना है
अहंकर होता है जिसे मान ही नहीं उसे अपमान किस चीज का उनको बुलाओ समाज में सरवत्रा आनंद और समवाद होना चाहिए मुझे इस विवाद को मिटाना है
10:56
ये बात शांति साकर जी महराज की इस वाक्य को उन्होंने वहाँ से सुन ली
ये बात शांति साकर जी महराज की इस वाक्य को उन्होंने वहाँ से सुन ली
11:01
ओ सीधा आये और आचारे महराज के चरनों पर माथा पकड़ते हैं और बोले महराज कुछ दिन पहले आप शास्तर सभा में बिना बोले बैटते हैं
ओ सीधा आये और आचारे महराज के चरनों पर माथा पकड़ते हैं और बोले महराज कुछ दिन पहले आप शास्तर सभा में बिना बोले बैटते हैं
11:10
देखकर के आप अज्यानी हो आपको कुछ आता
देखकर के आप अज्यानी हो आपको कुछ आता
11:13
नहीं ऐसे कटू अचनमाहिने सच्छ मुच बोले थे लेकिन
नहीं ऐसे कटू अचनमाहिने सच्छ मुच बोले थे लेकिन
11:16
आप धन्य है आपके पास शाब्दिक विद्वत्ता
आप धन्य है आपके पास शाब्दिक विद्वत्ता
11:19
हो ना हो आपके पास वीत्रागता की विद्वत्ता
हो ना हो आपके पास वीत्रागता की विद्वत्ता
11:23
है जिसे देखकर के आज हमारा जीवन धन्य हो
है जिसे देखकर के आज हमारा जीवन धन्य हो
11:26
गया
गया
11:26
है अईल
है अईल
11:40
पूरुष है ऐसा उनने उनका स्तवन किया उनके
पूरुष है ऐसा उनने उनका स्तवन किया उनके
11:43
गुणों की किर्ती का बकान किया और फिर
गुणों की किर्ती का बकान किया और फिर
11:46
बैट करके आचारे शांति सागर जी महराज जो
बैट करके आचारे शांति सागर जी महराज जो
11:49
निर्देश दे रहे थे जो उपदेश आदेश दे रहे थे उस
निर्देश दे रहे थे जो उपदेश आदेश दे रहे थे उस
11:52
प्रकार सभी लोगों ने उस चीज को मानने किया और वहां
प्रकार सभी लोगों ने उस चीज को मानने किया और वहां
11:56
का विवाद
का विवाद
12:10
पर
पर
12:24
आप
आप
12:37
इस दिगंबर मुद्रा को धारन करते हुए विहार नहीं कर सकते क्योंकि इस दिगंबर मुद्रा के कारण अन्य धर्मिय अन्य समाज जनों को ठेस पहुंच शकती है।
इस दिगंबर मुद्रा को धारन करते हुए विहार नहीं कर सकते क्योंकि इस दिगंबर मुद्रा के कारण अन्य धर्मिय अन्य समाज जनों को ठेस पहुंच शकती है।
13:10
नहीं करूंगा विहार में डाला गया यह जो प्रतिबंद
नहीं करूंगा विहार में डाला गया यह जो प्रतिबंद
13:13
है दिगंबर निरगरंत मुनियों की विहार में डाला गया यह जो रुकावटे है यह जब तक नहीं मिटाई जाएगी तब तक मैं अन्न जलका त्याग करता हूं
है दिगंबर निरगरंत मुनियों की विहार में डाला गया यह जो रुकावटे है यह जब तक नहीं मिटाई जाएगी तब तक मैं अन्न जलका त्याग करता हूं
13:24
सारा समाज दंगर हो गया सभी लोग स्थब्ध हो गया अब
सारा समाज दंगर हो गया सभी लोग स्थब्ध हो गया अब
13:28
ये शासकी ये प्रतिबंद कब हटाये जाएगा और आचारे
ये शासकी ये प्रतिबंद कब हटाये जाएगा और आचारे
13:31
महराज को कितने दिन तक उपवास करना पड़ेगा क्या पता इसे सोचते होए लोग बहुत ही व्यथित हो गया
महराज को कितने दिन तक उपवास करना पड़ेगा क्या पता इसे सोचते होए लोग बहुत ही व्यथित हो गया
13:37
तब समाज के संगली, कोलापूर और आस
तब समाज के संगली, कोलापूर और आस
13:41
पास के जिले के लोगों ने और समाज के
पास के जिले के लोगों ने और समाज के
13:44
गणमानने लोगों ने जैइन समाज के प्रभावशली लोगों ने वहाँ पहुँच करके सरकारी आधिकारियों को दिगंबर अत्व का महात्मे बताए।
गणमानने लोगों ने जैइन समाज के प्रभावशली लोगों ने वहाँ पहुँच करके सरकारी आधिकारियों को दिगंबर अत्व का महात्मे बताए।
13:52
जहिन विद्वानों ने उनको शास्त्र के समस्त संदर्व दिखाए
जहिन विद्वानों ने उनको शास्त्र के समस्त संदर्व दिखाए
13:55
और किसी भी आहलत में दिगंबर मुनियों को कोई भी काईदा या कोई भी कानुन रोक नहीं सकता इस प्रकार का आग्रह उनने किया तब जाकरके उन लोगों ने उस बात को मान लिया
और किसी भी आहलत में दिगंबर मुनियों को कोई भी काईदा या कोई भी कानुन रोक नहीं सकता इस प्रकार का आग्रह उनने किया तब जाकरके उन लोगों ने उस बात को मान लिया
14:08
चार दिन का उपवास होने के बाद वह प्रतिबंद हटाया गया।
चार दिन का उपवास होने के बाद वह प्रतिबंद हटाया गया।
14:37
अजे विहार करते हो ये किसी एक गाव में समाज कंतकों ने फिर से उनको घेर लिया।
अजे विहार करते हो ये किसी एक गाव में समाज कंतकों ने फिर से उनको घेर लिया।
14:43
ऐसे लेकल घेर, पहर उनलोग सकनर सबोसरे से लिया।
ऐसे लेकल घेर, पहर उनलोग सकनर सबोसरे से लिया।
14:48
घेर लिया घेरते ही तुरंत पता चलने पर जैन समाज के हजारों लोग हात में लाठी डंडे वगरे लेकर पहुंच गए
घेर लिया घेरते ही तुरंत पता चलने पर जैन समाज के हजारों लोग हात में लाठी डंडे वगरे लेकर पहुंच गए
14:56
तब चंदर सागर जी महाराज रोकने लगे देखें आचारी शंती सागर जी महाराज का दुरुष्टी कुन क्या है
तब चंदर सागर जी महाराज रोकने लगे देखें आचारी शंती सागर जी महाराज का दुरुष्टी कुन क्या है
15:03
जब अन्य समाज कंटक लोगों ने आचारी शंति
जब अन्य समाज कंटक लोगों ने आचारी शंति
15:06
सागर जी महाराज को संग सहीत लाटी डंडे कुलाडिया लेकर के रोक लिया तब पता चलती है आसपास के गाओं के हजारों लोग जैन समाज के वहाँ पर पहुंच गए वो भी हाथ में लाटी डंडे लेकर गए थे
सागर जी महाराज को संग सहीत लाटी डंडे कुलाडिया लेकर के रोक लिया तब पता चलती है आसपास के गाओं के हजारों लोग जैन समाज के वहाँ पर पहुंच गए वो भी हाथ में लाटी डंडे लेकर गए थे
15:18
तब आयलक चंदर सागर जी महराज उन लोगों को अपने आये होए साधर्मी बंदूं को रोकने लगे आरे
तब आयलक चंदर सागर जी महराज उन लोगों को अपने आये होए साधर्मी बंदूं को रोकने लगे आरे
15:24
वे लोग एक अज्यानी है आप हात में लाटी डंडे लेकर क्या इसा मत करो हिंसा अपने कारे में अपने संस्कूर्ती में शोभा नहीं देती है आपे सब छोड़ दो
वे लोग एक अज्यानी है आप हात में लाटी डंडे लेकर क्या इसा मत करो हिंसा अपने कारे में अपने संस्कूर्ती में शोभा नहीं देती है आपे सब छोड़ दो
15:34
भभ शांति के सागर वे शांति सिंदू आइलक श्री चंदर सागर जी को कहते है कि चंदर सागर जी
भभ शांति के सागर वे शांति सिंदू आइलक श्री चंदर सागर जी को कहते है कि चंदर सागर जी
15:41
आप शांतन हो क्या कहते हैं आप शांतन हो
आप शांतन हो क्या कहते हैं आप शांतन हो
15:46
मुनी संध पर देवशास्त्र गुरो और धर्म पर आये हूँ संकट का
मुनी संध पर देवशास्त्र गुरो और धर्म पर आये हूँ संकट का
15:50
निवारन करना श्रावकों का धर्म है ये विरोधी हिंसा में आता जरूर है
निवारन करना श्रावकों का धर्म है ये विरोधी हिंसा में आता जरूर है
15:55
लेकिन गुरहस्त देव देश और धर्म की रक्षा के लिए कथन चीत हिंसा कर भी सकते है उसमें उनको ज्यादा पापबंद नहीं होता
लेकिन गुरहस्त देव देश और धर्म की रक्षा के लिए कथन चीत हिंसा कर भी सकते है उसमें उनको ज्यादा पापबंद नहीं होता
16:04
उलट ये उनके कर्तव्य में समाविष्ट होता है अभी आप चुप रहो आप मौन रहो श्रावकों को अपना कर्तव्य करने देखी
उलट ये उनके कर्तव्य में समाविष्ट होता है अभी आप चुप रहो आप मौन रहो श्रावकों को अपना कर्तव्य करने देखी
16:15
प्रारंब में जब आपने गवरोगा था प्रारंब की थी तब एक प्रसंग आपको बताये था जब सात्गोंडा
प्रारंब में जब आपने गवरोगा था प्रारंब की थी तब एक प्रसंग आपको बताये था जब सात्गोंडा
16:22
शौच के लिए बाहर खेत में गए थे हाथ में लोटा ले करके तब क्या हुआ था?
शौच के लिए बाहर खेत में गए थे हाथ में लोटा ले करके तब क्या हुआ था?
16:29
एक साप मेंड़क को निगल रहा था तो साप को भी ठेश ना पहुंचे और मेंड़क की हिंसा ना हो इसलिए उन्होंने क्या किया था?
एक साप मेंड़क को निगल रहा था तो साप को भी ठेश ना पहुंचे और मेंड़क की हिंसा ना हो इसलिए उन्होंने क्या किया था?
16:38
हाथ का लोटा पत्थर पर जोर से पटक करके
हाथ का लोटा पत्थर पर जोर से पटक करके
16:41
साप के मुख से मेंड़क को छुड़ाया था मेंड़क
साप के मुख से मेंड़क को छुड़ाया था मेंड़क
16:45
भी बच गया साप भी निकल गया उन छोटे छोटे जिवों की रक्षा करने के लिए तत पर गोहषत अवस्ता में थे साथ गोंडा
भी बच गया साप भी निकल गया उन छोटे छोटे जिवों की रक्षा करने के लिए तत पर गोहषत अवस्ता में थे साथ गोंडा
16:53
आज मुनिय आवस्था में वो अयलक चंद्रसागर
आज मुनिय आवस्था में वो अयलक चंद्रसागर
16:56
जी को कहते हैं मुनि संग की धर्म की देवशास्त्र
जी को कहते हैं मुनि संग की धर्म की देवशास्त्र
16:59
गुरु की रक्षा करना गुरहस्तों का दाइत
गुरु की रक्षा करना गुरहस्तों का दाइत
17:02
हो है श्रावकों का करतव है अभी आप यहां हिउसा
हो है श्रावकों का करतव है अभी आप यहां हिउसा
17:06
अहिउसा कहते हो हैं मत बैटो आप उसके अनुमोदना भी
अहिउसा कहते हो हैं मत बैटो आप उसके अनुमोदना भी
17:09
मत
मत
17:09
करना औ
करना औ
17:23
तब श्रावक जब आगे बढ़े तब समाज कंटकों को दवडने के लिए जमिन कम पढ़ने लगे पढ़ता भूई क्यों?
तब श्रावक जब आगे बढ़े तब समाज कंटकों को दवडने के लिए जमिन कम पढ़ने लगे पढ़ता भूई क्यों?
17:33
क्योंकि ये आवश्चक था उनों कि श्वयम उसका समर्थन तो नहीं किया
क्योंकि ये आवश्चक था उनों कि श्वयम उसका समर्थन तो नहीं किया
17:37
बस स्वयम मौंड रहो श्रावक अपना कार्य कर रहे हम अनूओन नहीं करेंगे लेकिन वो अपना कार्य स्वभिवेक से करते है तो वो श्वतंत्र है
बस स्वयम मौंड रहो श्रावक अपना कार्य कर रहे हम अनूओन नहीं करेंगे लेकिन वो अपना कार्य स्वभिवेक से करते है तो वो श्वतंत्र है
17:45
और हो उनका कर्दव्य है शांती सागर जी महाराज धर्म रक्षा के लिए इतने सजक्त है
और हो उनका कर्दव्य है शांती सागर जी महाराज धर्म रक्षा के लिए इतने सजक्त है
17:52
निरगरंतता दिगं बरत्व की रक्षा के लिए इतने जागरुक थे और आज हमारा भी कर्दव्य बनता है आज अपने जैन
निरगरंतता दिगं बरत्व की रक्षा के लिए इतने जागरुक थे और आज हमारा भी कर्दव्य बनता है आज अपने जैन
17:59
तीर्तकषेत्रों पर सिद्धकषेत्रों पर अधिशेकषेत्रों पर
तीर्तकषेत्रों पर सिद्धकषेत्रों पर अधिशेकषेत्रों पर
18:02
मंदिरों पर अन्य लोग कितना अधिक्रमन
मंदिरों पर अन्य लोग कितना अधिक्रमन
18:06
कर रहे हमारी मंदिर हमारी मंदिर हमारे ख़ीत्र आज हड़ पे जा रहे हैं और हम हैं कि 13 पंध मेरा पंध विस पंध कहान पंध किस चीजों में उलजी हैं
कर रहे हमारी मंदिर हमारी मंदिर हमारे ख़ीत्र आज हड़ पे जा रहे हैं और हम हैं कि 13 पंध मेरा पंध विस पंध कहान पंध किस चीजों में उलजी हैं
18:19
जिन चीजों को महान पूर्वाचारियों ने अपने
जिन चीजों को महान पूर्वाचारियों ने अपने
18:23
बलिदान को दे करके रक्षन करते होई बचाया
बलिदान को दे करके रक्षन करते होई बचाया
18:26
है और आज हम लोग अपने ही क्रेडिट कारण में
है और आज हम लोग अपने ही क्रेडिट कारण में
18:29
उल्जे होई पंथवाद संतवाद में उलज करके
उल्जे होई पंथवाद संतवाद में उलज करके
18:32
मंदीर तीर्थक्षेतर सिद्धक्षेतर आतिशेक्षेत्रों को
मंदीर तीर्थक्षेतर सिद्धक्षेतर आतिशेक्षेत्रों को
18:35
दुरल
दुरल
18:48
हम आज उसके लिए जिम्मेदार हैं। इस
हम आज उसके लिए जिम्मेदार हैं। इस
18:52
प्रकार विहार करते करते, फिर आचारी शांतिसागरजी महराज का चात्रमास उन्निस सो चब्वीस में धर्मनगरी नांदनी में हुआ।
प्रकार विहार करते करते, फिर आचारी शांतिसागरजी महराज का चात्रमास उन्निस सो चब्वीस में धर्मनगरी नांदनी में हुआ।
19:02
कहां पर हुआ? कुलापुर जिले के शिरोल
कहां पर हुआ? कुलापुर जिले के शिरोल
19:05
तहसील में जो भटारक पीठ है, जिंसेन भटारक पीठ उस नादनी धर्मनगरी में आचारे शांति सागरजी महराज का 1926 का चातुरमास हुआ
तहसील में जो भटारक पीठ है, जिंसेन भटारक पीठ उस नादनी धर्मनगरी में आचारे शांति सागरजी महराज का 1926 का चातुरमास हुआ
19:17
ओस चातुर मास में आचारी देव शनति सागर जी महराज nे
ओस चातुर मास में आचारी देव शनति सागर जी महराज nे
19:22
बहूत अच्छी मातरा में लोगों को प्रभोधित किया
बहूत अच्छी मातरा में लोगों को प्रभोधित किया
19:25
बाल विवाह विध्वा विवाह का विरोध किया
बाल विवाह विध्वा विवाह का विरोध किया
19:30
और एक दिन आचारी शनति शागर जी महराज ने देखा कि अपने समाज का एक छोटा बच्चा
और एक दिन आचारी शनति शागर जी महराज ने देखा कि अपने समाज का एक छोटा बच्चा
19:36
जो पढ़ाई से दूर है स्कूली विध्यालेम जीवन से
जो पढ़ाई से दूर है स्कूली विध्यालेम जीवन से
19:40
दूर है और गरीबी के कारण गाय भहिसों को चराती होये पशुओं को चराती होइे खेतों में काम कर रहा है और विध्यालेम शिक्षा के कारण
दूर है और गरीबी के कारण गाय भहिसों को चराती होये पशुओं को चराती होइे खेतों में काम कर रहा है और विध्यालेम शिक्षा के कारण
19:49
निरक्षर रहने चारण लोगों तब आचारे शांतिशागर जी महराज ने समाज के प्रतिनिधियों को बुला करके प्रतिष्टित गन मान्य लोगों को बुला करके
निरक्षर रहने चारण लोगों तब आचारे शांतिशागर जी महराज ने समाज के प्रतिनिधियों को बुला करके प्रतिष्टित गन मान्य लोगों को बुला करके
20:01
याले जीवन में विद्यालईन जीवन में अपने समाज के
याले जीवन में विद्यालईन जीवन में अपने समाज के
20:04
बच्चे कैसे बढ़ेंगे और समाज
बच्चे कैसे बढ़ेंगे और समाज
20:08
साकशर कैसे होगा इस बात पर जोर दिया और जोर देते देते उसी के अंतरगत आज जो शेडबाल में शांती सागर अनात अश्रम है न
साकशर कैसे होगा इस बात पर जोर दिया और जोर देते देते उसी के अंतरगत आज जो शेडबाल में शांती सागर अनात अश्रम है न
20:20
अज बहुत
अज बहुत
20:32
सव्चे से चल रहे है अचारी स्चागरजी महराज
सव्चे से चल रहे है अचारी स्चागरजी महराज
20:35
जब व्यहार करता हो उस तरभ भी गए थे पर
जब व्यहार करता हो उस तरभ भी गए थे पर
20:38
वहां के लोगों को उन्होंने कहा था कि
वहां के लोगों को उन्होंने कहा था कि
20:42
समाज में इसे जो गरीब विद्यारती है दीनहीन विद्यारती है जो बुद्धिमान है प्रतिभावनता है
समाज में इसे जो गरीब विद्यारती है दीनहीन विद्यारती है जो बुद्धिमान है प्रतिभावनता है
20:48
लेकिन परिश्दिति के आधिन होने के कारण विद्यालई इन
लेकिन परिश्दिति के आधिन होने के कारण विद्यालई इन
20:51
शिक्षा को ग्रहन नहीं कर पा रहे है निरक्षर रहने के कारण अंदशर्धा की ओर बढ़ रहे है व्यस्टना अधिनता की ओर जा रहे है तो आज समाज के इं छोटे छोटे बच्चों को
शिक्षा को ग्रहन नहीं कर पा रहे है निरक्षर रहने के कारण अंदशर्धा की ओर बढ़ रहे है व्यस्टना अधिनता की ओर जा रहे है तो आज समाज के इं छोटे छोटे बच्चों को
21:01
आगे विसना धिनता में जाने के पहले ही बाल्यावस्ता से इनके लिए विद्याले इन शिक्षन का प्रबंधन किया जाना चाहिए
आगे विसना धिनता में जाने के पहले ही बाल्यावस्ता से इनके लिए विद्याले इन शिक्षन का प्रबंधन किया जाना चाहिए
21:08
तब आचारी शंतिसागर्जी महाराज की प्रेरना से उन लोगों ने शैक्षनिक उपक्रम अपने जीवन में करने के लिए समर्थन और समर्पन दिया
तब आचारी शंतिसागर्जी महाराज की प्रेरना से उन लोगों ने शैक्षनिक उपक्रम अपने जीवन में करने के लिए समर्थन और समर्पन दिया
21:19
और उनी की प्रेरना से अर्था चांती सागर जी महाराज की प्रेरना से शेडवाल में अनात विद्यारतियों के लिए गरिब विद्यारतियों के लिए चातरा अशरम खोला गया
और उनी की प्रेरना से अर्था चांती सागर जी महाराज की प्रेरना से शेडवाल में अनात विद्यारतियों के लिए गरिब विद्यारतियों के लिए चातरा अशरम खोला गया
21:29
कुमभोज बहुवली का जो गुरुकुल है उस गुरुकुल को खोलने की प्रेरना उसको प्रारंभ करने की प्रेरना भी आचारे शांतिसागर जी महाराज की हैं।
कुमभोज बहुवली का जो गुरुकुल है उस गुरुकुल को खोलने की प्रेरना उसको प्रारंभ करने की प्रेरना भी आचारे शांतिसागर जी महाराज की हैं।
22:03
और विद्यार्तियों को बच्चों को पढ़ने पढ़ने के
और विद्यार्तियों को बच्चों को पढ़ने पढ़ने के
22:06
लिए बहुत हद्दक समाज को प्रेरित किया। ऐसा
लिए बहुत हद्दक समाज को प्रेरित किया। ऐसा
22:10
करते करते नादनी का 1926 का चात्रमास होने के
करते करते नादनी का 1926 का चात्रमास होने के
22:13
बाद आचारिय शांति सागर जी महाराज संग सहीत
बाद आचारिय शांति सागर जी महाराज संग सहीत
22:16
विहार करते करते कुंतलगिरी के लिए गए। गये दिए कुंत्वा पूर्ण स्थान है
विहार करते करते कुंतलगिरी के लिए गए। गये दिए कुंत्वा पूर्ण स्थान है
22:49
करके मानो तपस्या के लिए खड़े हुए है किया क्या इस
करके मानो तपस्या के लिए खड़े हुए है किया क्या इस
22:52
प्रकार का भास होना चाहिए ऐसे देश भूशन
प्रकार का भास होना चाहिए ऐसे देश भूशन
22:56
कुल भूशन भगवान की अत्यन्त मनोहारी प्रतिमाई यहां
कुल भूशन भगवान की अत्यन्त मनोहारी प्रतिमाई यहां
22:59
बैठे हुए शायद ही कोई होंगे कि जो कुंतलगिरी नहीं गए
बैठे हुए शायद ही कोई होंगे कि जो कुंतलगिरी नहीं गए
23:03
है लगबग
है लगबग
23:04
सभी गए
सभी गए
23:04
है छोटे-छो
है छोटे-छो
23:19
पद्म पुरान ग्रंत राज में रविशेन
पद्म पुरान ग्रंत राज में रविशेन
23:23
आचारी जी ने बताया कि राम चिंद्र जी के काल में मुनिसूरतनाथ भगवान के धर्मतीर्थ में देश भूशन कुल भूशन नाम के दो राज पुत्र होई
आचारी जी ने बताया कि राम चिंद्र जी के काल में मुनिसूरतनाथ भगवान के धर्मतीर्थ में देश भूशन कुल भूशन नाम के दो राज पुत्र होई
23:32
आप वो सब प्रसंग नहीं बताते होई नहीं बैटूंगा
आप वो सब प्रसंग नहीं बताते होई नहीं बैटूंगा
23:36
लेकिन उन दोनों ने कारण विशेश से वैराग्य
लेकिन उन दोनों ने कारण विशेश से वैराग्य
23:39
धारन किया उग्र तप धारन किया रामचंदर
धारन किया उग्र तप धारन किया रामचंदर
23:42
जब लक्षमन सिता जी के साथ वनवास काल में थे
जब लक्षमन सिता जी के साथ वनवास काल में थे
23:46
उस समय एक स्थान पर देश भूशन कुल
उस समय एक स्थान पर देश भूशन कुल
23:49
भूशन
भूशन
23:50
मुनिराज पर
मुनिराज पर
24:02
ध्यान अवस्था में, सललग्न ध्यान अवस्था में तलिन उन दोनों मुणियों को उपसरग मिटते ही केवल ग्यान की प्राप्ती हुई किसकी प्राप्ति हुई?
ध्यान अवस्था में, सललग्न ध्यान अवस्था में तलिन उन दोनों मुणियों को उपसरग मिटते ही केवल ग्यान की प्राप्ती हुई किसकी प्राप्ति हुई?
24:39
गरनन देश
गरनन देश
24:39
बूरी बूरान
बूरी बूरान
24:40
को प्राप्त
को प्राप्त
24:53
होते हैं ऐसा उनका जीवन चरित्र पद्म पुरान में
होते हैं ऐसा उनका जीवन चरित्र पद्म पुरान में
24:56
बताया है, वहां आचारे शंति सागरजी महाराज पहुँचते
बताया है, वहां आचारे शंति सागरजी महाराज पहुँचते
24:59
हैं, और वहां पहुँच करके आती गदगद होकर
हैं, और वहां पहुँच करके आती गदगद होकर
25:02
कि उनने
कि उनने
25:02
भगवान का
भगवान का
25:03
दर्शन, उनकी
दर्शन, उनकी
25:04
स्तुति, उन
स्तुति, उन
25:20
पुर में भरपूर प्रभावना की बारामती मोडनिम्ब के दर्म्यान उनने पंचकल्यानत की और विहार करते गरते वे फल्टन आये।
पुर में भरपूर प्रभावना की बारामती मोडनिम्ब के दर्म्यान उनने पंचकल्यानत की और विहार करते गरते वे फल्टन आये।
25:51
जब आचारे महराज फल्टन नगरी में पहुंचे उस
जब आचारे महराज फल्टन नगरी में पहुंचे उस
25:54
समय अपनी ही एक जैन बंदू जीवराज
समय अपनी ही एक जैन बंदू जीवराज
25:57
केवल चंद दोशी जो थे जैन लेकिन जैनत्व के प्रभाव से वो थोड़ा दूर होये थे और कबीर पंथ के अनुयाई बन गए थे
केवल चंद दोशी जो थे जैन लेकिन जैनत्व के प्रभाव से वो थोड़ा दूर होये थे और कबीर पंथ के अनुयाई बन गए थे
26:09
किस पंथ के? कबीर पंथ के आनुयाई बन गए थे कबीर पंथ के आचार विचार को फॉलो कर रहे थे
किस पंथ के? कबीर पंथ के आनुयाई बन गए थे कबीर पंथ के आचार विचार को फॉलो कर रहे थे
26:16
परिक्षा किये बिना किसी को सोचे समझे बिना वो कभी नमस्कार नहीं करते थे
परिक्षा किये बिना किसी को सोचे समझे बिना वो कभी नमस्कार नहीं करते थे
26:22
अब ये जीवराज केवलचंद दोशी जब आचारी शंति सागर जी महाराज फल्टन में पहुंचे है, ऐसा सुनते है तब उनके पास आते है
अब ये जीवराज केवलचंद दोशी जब आचारी शंति सागर जी महाराज फल्टन में पहुंचे है, ऐसा सुनते है तब उनके पास आते है
26:32
और वहां आए आचारी महाराज बैठे थे आसन पर
और वहां आए आचारी महाराज बैठे थे आसन पर
26:36
उनके पास ये आएलग चन्द सागर जी महाराज ौर संग के आन्नि भी सादू वुरंद वहाँ पर विराज मान थे
उनके पास ये आएलग चन्द सागर जी महाराज ौर संग के आन्नि भी सादू वुरंद वहाँ पर विराज मान थे
26:42
जीवराज दोशी वहाँ आते है और आकर सिधे बैट जाते है
जीवराज दोशी वहाँ आते है और आकर सिधे बैट जाते है
26:48
उन्होंने ना वंदन किया ना विनए की ना अचारे महराज के लिए नमस्कार किया
उन्होंने ना वंदन किया ना विनए की ना अचारे महराज के लिए नमस्कार किया
26:53
आ गए और सिधे वहाँ पर उनके पास में श्रावकों को बैटने के योग्य जो स्थान था ग्रोहस्तों के बैटने के लिए जो जगह थी
आ गए और सिधे वहाँ पर उनके पास में श्रावकों को बैटने के योग्य जो स्थान था ग्रोहस्तों के बैटने के लिए जो जगह थी
27:00
वहां बैट गए, सीधे बैट गए, ना हाज जोड़ा ना वंदन किया ना विनाय ना नमस्कार कुछ नहीं
वहां बैट गए, सीधे बैट गए, ना हाज जोड़ा ना वंदन किया ना विनाय ना नमस्कार कुछ नहीं
27:07
आइसी ही बैटे हैं वो परिक्षा करना चाहते थे देखना चाहते थे कि ये साधु है सन्यासी है ये चिड़ते है क्या
आइसी ही बैटे हैं वो परिक्षा करना चाहते थे देखना चाहते थे कि ये साधु है सन्यासी है ये चिड़ते है क्या
27:15
टेम्परेशर इनका बढता है पारा उपर चड़ता है ये उनको देखना था इसलिए वो जान बुझ करके वैसी ही बैट गए बिना विनए वंदन के
टेम्परेशर इनका बढता है पारा उपर चड़ता है ये उनको देखना था इसलिए वो जान बुझ करके वैसी ही बैट गए बिना विनए वंदन के
27:24
बैट गे तब ऐसी बैटते हुए उनको देख करके अयलक चंदर सागर जी महाराज कहते है अरे आपके भीतर कुछ विनए बाव है क्या नहीं
बैट गे तब ऐसी बैटते हुए उनको देख करके अयलक चंदर सागर जी महाराज कहते है अरे आपके भीतर कुछ विनए बाव है क्या नहीं
27:35
इतने बड़े गुरुवर बैटे है ऐसे तपस्वी मनस्वी आचारे महाराज बैटे है आपको साधा नमस्कर करने की नमस्तु करने की भी इतनी भी बुधि नहीं है
इतने बड़े गुरुवर बैटे है ऐसे तपस्वी मनस्वी आचारे महाराज बैटे है आपको साधा नमस्कर करने की नमस्तु करने की भी इतनी भी बुधि नहीं है
27:45
अयसा चंदर सागर जी महराज के कहते ही जीव राज दोशी कहते है कि अयसे बंदर मैंने बहुत देखे बंदर मंजे माकड
अयसा चंदर सागर जी महराज के कहते ही जीव राज दोशी कहते है कि अयसे बंदर मैंने बहुत देखे बंदर मंजे माकड
27:55
आशी माकड में फार पाहिलित क्या कहा उन्हें ऐसे बंदर मैंने बहुत देखे
आशी माकड में फार पाहिलित क्या कहा उन्हें ऐसे बंदर मैंने बहुत देखे
28:02
फट से उन्हें ऐसा जबाब दे दिया अपन होते तो
फट से उन्हें ऐसा जबाब दे दिया अपन होते तो
28:07
बंदर कहते हैं अपन सिधा जो कुछ बे आसपास मिलता हाथ में उठा करके उसके पीछे दोड़ते
बंदर कहते हैं अपन सिधा जो कुछ बे आसपास मिलता हाथ में उठा करके उसके पीछे दोड़ते
28:16
उन्हें आचारे शांति सागर जी महराज एक युग पुरुष
उन्हें आचारे शांति सागर जी महराज एक युग पुरुष
28:20
महापुरुष के सामने उसी महापुरुष को कहा कि
महापुरुष के सामने उसी महापुरुष को कहा कि
28:23
आसे बंदर मैंने बहुत देखे फिर भिवे सिंधू शांती के सागर यथा नाम तथा गुन स्वनाम धन्य आचारे शांती सागर्जी महाराज
आसे बंदर मैंने बहुत देखे फिर भिवे सिंधू शांती के सागर यथा नाम तथा गुन स्वनाम धन्य आचारे शांती सागर्जी महाराज
28:33
उसी शांत भाव से वीत्राग भाव से बैठे रहे और फिर
उसी शांत भाव से वीत्राग भाव से बैठे रहे और फिर
28:39
क्षन दो क्षन के बाद स्वयम आचारे शांतिसागरजी महाराज ने उनों जीवराज केवल चंद दोशी से कुछ बाते पूछी आप कहां से आये है स्वाध्याय करते है क्या
क्षन दो क्षन के बाद स्वयम आचारे शांतिसागरजी महाराज ने उनों जीवराज केवल चंद दोशी से कुछ बाते पूछी आप कहां से आये है स्वाध्याय करते है क्या
28:50
आपने जैन आवगम को पढ़ाए क्या थोड़ाएख स्वाध्याय करते जाएए
आपने जैन आवगम को पढ़ाए क्या थोड़ाएख स्वाध्याय करते जाएए
28:55
देवशास्तर गुरु का स्वरूप ऐसा होता है देवशास्तर गुरु के दोरा बतायगए तत्वार्त का इस प्रकार स्वरूप है
देवशास्तर गुरु का स्वरूप ऐसा होता है देवशास्तर गुरु के दोरा बतायगए तत्वार्त का इस प्रकार स्वरूप है
29:00
इत्या दी रूप से बहूत ही वातसल्य भाव पुरुवक
इत्या दी रूप से बहूत ही वातसल्य भाव पुरुवक
29:04
उनोंने उनके लिए बहूत अच्छा संभोधन
उनोंने उनके लिए बहूत अच्छा संभोधन
29:07
दिया तब जीवराज केवल चंद दोशी समझ गए कि मैंने बहूत गलत तरीके से इसे महान व्यक्ति के लिए बात कही है
दिया तब जीवराज केवल चंद दोशी समझ गए कि मैंने बहूत गलत तरीके से इसे महान व्यक्ति के लिए बात कही है
29:19
मैंने इतने कटू बात बोली कि उस बात
मैंने इतने कटू बात बोली कि उस बात
29:22
को सुनते ही साधारन मनुष्य का माथा फट जाता
को सुनते ही साधारन मनुष्य का माथा फट जाता
29:25
लेकिन इन महापुरुष्णे इन महामना आचारे महराज ने मुख मंडल पर क्रोध का एक सामान्य भाव भी नहीं आने दिया
लेकिन इन महापुरुष्णे इन महामना आचारे महराज ने मुख मंडल पर क्रोध का एक सामान्य भाव भी नहीं आने दिया
29:35
और तब उनमें पध्र-पकड़ करके क्षमा मांगी और क्षमा मांग करके कहने लगे कि गुरुवर, मैंने आपको बंदर कहा
और तब उनमें पध्र-पकड़ करके क्षमा मांगी और क्षमा मांग करके कहने लगे कि गुरुवर, मैंने आपको बंदर कहा
29:43
मर कट कहा आणि मजाया अनादराचा भावामोल वी फार करम बंद करूंगे तिला
मर कट कहा आणि मजाया अनादराचा भावामोल वी फार करम बंद करूंगे तिला
29:51
मैंने आपका अनादर करके घोर कर्म बंदतों कर लिया है
मैंने आपका अनादर करके घोर कर्म बंदतों कर लिया है
29:54
मैं आपकी क्षमा मांगने का पात्र नहीं हूँ फिर भी आप महान क्षमा के सागर है आप मुझे क्षमा करेंगे यह मेरा संपूर्ण विश्वास है
मैं आपकी क्षमा मांगने का पात्र नहीं हूँ फिर भी आप महान क्षमा के सागर है आप मुझे क्षमा करेंगे यह मेरा संपूर्ण विश्वास है
30:06
तब आगे आचारी शंतिसागर जी महाराज कहते है महाशे
तब आगे आचारी शंतिसागर जी महाराज कहते है महाशे
30:11
आपने मुझे बंदर कहा उसमें गलत क्या है 36 अगर आख्यारे महराज क्या कहते है
आपने मुझे बंदर कहा उसमें गलत क्या है 36 अगर आख्यारे महराज क्या कहते है
30:18
आपने मुझे बंदर कहा इसमें गलत क्या है तुम्हें मैला मांकड़ मन ला है करनो को मनता है
आपने मुझे बंदर कहा इसमें गलत क्या है तुम्हें मैला मांकड़ मन ला है करनो को मनता है
30:26
आपने मुझे बंदर कहा इसमें गलत क्या है
आपने मुझे बंदर कहा इसमें गलत क्या है
30:30
जिस प्रकार बंदर आज यहां जुके
जिस प्रकार बंदर आज यहां जुके
30:35
में आपकोशा
में आपकोशा
30:39
आपकोशा कुछा और सब्सक्राइब
आपकोशा कुछा और सब्सक्राइब
30:44
लोग का सब जोए भाव
लोग का सब जोए भाव
30:47
तरने हमें अक्ट वैंच में जा निस्णग बंदर का लिए विणा जन सब्सक्राइब
तरने हमें अक्ट वैंच में जा निस्णग बंदर का लिए विणा जन सब्सक्राइब
30:59
एक उधारन दिया उनने, बंदर जिस प्रकार सारे
एक उधारन दिया उनने, बंदर जिस प्रकार सारे
31:02
इस जगा का, उस जगा का मुह के बिना, जहां
इस जगा का, उस जगा का मुह के बिना, जहां
31:05
चाहे वहां जाता रहता है, उसी प्रकार गाओ का, अस्थान का और किसी चीज का बंदन तोड़े बिना, आत्मा का दर्शन नहीं हो सकता.
चाहे वहां जाता रहता है, उसी प्रकार गाओ का, अस्थान का और किसी चीज का बंदन तोड़े बिना, आत्मा का दर्शन नहीं हो सकता.
31:15
इसलिए आत्मा का दर्शन करने के लिए आध्यात्मीक बंदर ही बनना पड़ता है ऐसा गहन गंभीर अर्थ उन्होंने प्रस्तूत किया
इसलिए आत्मा का दर्शन करने के लिए आध्यात्मीक बंदर ही बनना पड़ता है ऐसा गहन गंभीर अर्थ उन्होंने प्रस्तूत किया
31:24
देखिए हमें घर में कोई व्यक्ति यहां से उटकर वहां बैट एदि कहता है
देखिए हमें घर में कोई व्यक्ति यहां से उटकर वहां बैट एदि कहता है
31:31
कितना पारा चड़ता है मैं ने घर बांधिया मैं ने कमाया है मैं ने ये सब घड़ा किया है और मुझे कहते हो कि यहां से उठकर वहां बैटो
कितना पारा चड़ता है मैं ने घर बांधिया मैं ने कमाया है मैं ने ये सब घड़ा किया है और मुझे कहते हो कि यहां से उठकर वहां बैटो
31:42
जिनों ने श्रमन समस्कृती को खड़ा किया है सामान ने आदमी घर खड़ा करता है जोपडि कुटिया खड़ी करता है तो कहता है ये सब मैने खड़ा किया है
जिनों ने श्रमन समस्कृती को खड़ा किया है सामान ने आदमी घर खड़ा करता है जोपडि कुटिया खड़ी करता है तो कहता है ये सब मैने खड़ा किया है
31:52
जिनोंने लड़कडाती हुई बिखरी हुई टूटी
जिनोंने लड़कडाती हुई बिखरी हुई टूटी
31:55
फूटी खंडित हो चोकी श्रमन संस्कूर्ती को भक्कम रूप से मजबूत रूप से खड़ा किया है वे कहते है आत्मा का दर्शन करने के लिए ये बंदर ही तो बनना पड़ता है।
फूटी खंडित हो चोकी श्रमन संस्कूर्ती को भक्कम रूप से मजबूत रूप से खड़ा किया है वे कहते है आत्मा का दर्शन करने के लिए ये बंदर ही तो बनना पड़ता है।
32:36
और उस चात्रमास में क्या महान क्रांतिकारई कदम वे उठाते हैं इस क्लाइमेक्स को अग्रिम सत्र में देखते हैं।
और उस चात्रमास में क्या महान क्रांतिकारई कदम वे उठाते हैं इस क्लाइमेक्स को अग्रिम सत्र में देखते हैं।
33:05
चिंतामनिंचिंतितवस्तुदाने त्वाम्वंदमानस्यमास्तुदेवी नौजाप्राइब।
चिंतामनिंचिंतितवस्तुदाने त्वाम्वंदमानस्यमास्तुदेवी नौजाप्राइब।